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लेम्बोर्गिनी कांड में अरबपति कारोबारी का बेटा गिरफ्तार, पिता की सारे हथकंडे फेल

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कानपुर। वीआईपी रोड पर 8 फरवरी को हुए चर्चित लेम्बोर्गिनी कांड में आखिरकार अरबपति तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा पुलिस के शिकंजे में आ गया। तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को उड़ाने के बाद से पूरा मामला रसूख, दबाव और बचाव के आरोपों में उलझ गया था। घटना के बाद परिवार ने बेटे को बचाने के लिए हर तरह की कोशिश की—पुलिस को मैनेज करने से लेकर नकली ड्राइवर पेश करने तक—लेकिन अंत में सारी कोशिशें नाकाम रहीं और गुरुवार सुबह पुलिस ने शिवम को आर्यनगर स्थित उसके घर के सामने से गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल के बाद उसे AJCM कोर्ट में पेश किया गया। इसी दौरान वह वीडियो बनाती मीडिया पर भड़क गया और इशारों में रिकॉर्डिंग बंद करने को कहा।

कैसे हुआ था हादसा
रविवार को तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी भैरोंघाट चौराहे के पास ऑटो और बुलेट को टक्कर मारते हुए बिजली के खंभे से जा भिड़ी थी। कार ऑटो के ऊपर चढ़ गई और आसपास खड़े लोग उछलकर दूर जा गिरे। चमनगंज घोसियाना निवासी तौफीक अहमद के पैर में गंभीर चोट आई थी, जबकि बुलेट सवार विशाल त्रिपाठी और सोनू त्रिपाठी घायल हुए थे। घटना के बाद सोशल मीडिया पर मामला सुर्खियों में आया तो देर रात अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज हुई।

5 बड़े पॉइंट—कैसे बेटा बचाने की कोशिशें ध्वस्त हुईं

1. थाने में VIP ट्रीटमेंट, FIR में देरी
हादसे के बाद लेम्बोर्गिनी को थाने में उसी जगह खड़ा किया गया जहाँ थानेदार की गाड़ी रखी जाती है। कार को कवर किया गया और बाउंसर तैनात किए गए। FIR रात 8:30 बजे सोशल मीडिया पर बवाल मचने के बाद दर्ज हुई। राजनीतिक दबाव बढ़ा तो शिवम का नाम जोड़ा गया।

2. कमिश्नर के बयान पर पिता ने पलटवार
कमिश्नर रघुबीर लाल ने स्पष्ट कहा कि हादसे के समय शिवम ही ड्राइविंग सीट पर था। अगले दिन कारोबारी पिता केके मिश्रा थाने पहुंचे और बोले—“कार चालक मोहन चला रहा था, शिवम सो रहा था।” पुलिस के दावे पर पिता ने सीधे सवाल खड़े किए।

3. घायल तौफीक के समझौते की बात, पुलिस ने नकारी
कारोबारी पक्ष ने कोर्ट में समझौतानामा दाखिल किया कि तौफीक को खर्च दे दिया गया है और वह कार्रवाई नहीं चाहता। लेकिन DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा—“पुलिस को कोई समझौता नहीं मिला, आरोपी शिवम ही है।”

4. नकली ड्राइवर का सरेंडर—बयान में झोल
बुधवार दोपहर अचानक ड्राइवर मोहन कोर्ट में सरेंडर करने पहुंचा और बोला—“गाड़ी मैंने चलाई थी, हादसे के बाद डरकर निकल आया।” लेकिन जब उससे कार के गियर के बारे में पूछा गया, तो वह गलत जवाब देकर पकड़ा गया। उसकी कहानी झूठी साबित हुई।

5. कोर्ट ने मोहन को आरोपी मानने से इनकार किया
अर्जी खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा—“पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन नहीं।” इसके बाद परिवार की आखिरी चाल भी फेल हो गई।

गिरफ्तारी के वक्त बीमार नजर आया शिवम
पुलिस ने बताया कि शिवम को उसके घर के सामने से पकड़ा गया। गिरफ्तारी के दौरान वह खुद चलने की स्थिति में भी नहीं दिख रहा था। पुलिसकर्मी उसे सहारा देकर मेडिकल के लिए ले गए। कोर्ट में पेशी के दौरान वीडियो बनाने पर वह भड़क गया।
DCP सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि प्रारंभिक जांच और तकनीकी साक्ष्य में शिवम ही चालक पाया गया था, इसलिए उसकी गिरफ्तारी की गई है। अब आगे की कार्रवाई अदालत तय करेगी।

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